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लेखनी प्रतियोगिता -22-Jul-2022 नीम के पेड़ का भूत

हरीश आज बहुत दिनौ बाद अपने गाँव गया जारहा था। क्यौकि जब उसके पापा की नौकरी शहर में लगी थी तबसे उसके पापा शहर में ही फसकर रहगये थे क्यौकि चारौ तरफ करौना की बीमारी जो फैल रही थी ट्रैन भी नही जारही थी 


              हरीश को वह दिन भी याद आरहे थे जब वह पाँचवी में गाँव के स्पकूल में पढता था। हरीश जब स्कूल से वापिस  आता था तब उसके खेत व वगीचा रास्ते मे पड़ता था। उस बगीचे में एक बहुत पुराना नीम का पेड़ भी था।  हरीश हर रोज उस नीम के पेड़ के नीचे बैठ कर आराम अवश्य करता था।

     सावन के महीने में जब उस पर निवौलियाँ आती थी हरीश को पकी हुई निवौली खाने में बहुत आनन्द महसूस होता था। 

    हरीश की दादी  बताती थी कि यह नीम का पेड़ उसके दादाजी ने लगाया था। वह इस नीम के पेड़ की डाली से अपने दाँत अवश्य साफ करते थे।

       जब हरीश अपने गाँव पहुँचा उसे सब याद आगया ।वह अपने दोस्तौ के साथ किस तरह उस नीम के पेड़ पर दौड़ कर चढ़जाता  था।  उसकी डालियौ पर लटक कर खेलता था।

    एक बार वह अकेला ही बगीचे मे आया था उसका कोई दोस्त उस दिन नहीं आया था।  उस दिन उसने जामुन तोड़कर खाये और आम के पेड़ से आम भी तोड़ कर लाया और नीम के पेड़ के नीचे पहुँचकर आराम करने लगा।

     जैसे ही उसे नींद आई बैसे ही उसको सफेद कुर्ता धोती पहने हुए और सर पर सफेद रंग की टोपी व बडी़ बडी़ मूछौ वाले दादाजी जैसे दिखने वाले एक बृद्ध पुरुष  उसके पास आये और उससे कड़कती हुई आवाज में बोले " हरीश तू यहाँ तपती दुपहरी में अकेला क्यौ आया है तुझे मालूम नही इस नीम के पेड़ पर एक भूत रहता है। तू अकेला मत आया कर।  वह भूत छोटे बच्चौ को अकेला देखकर अपना शिकार करता है। "

       इतना समझा कर वह गायब होगये जब हरीश की आँख खुली उसे सपना याद करके डर लगने लगा। तब वह वहाँ से  जाने लगा तब उसे ऐसा महसूस होने लगा कि कोई उसके पीछे आरहा है क्यौकि उसको किसी के चलने के पैरौ की पदचाप सुनाई देरही थी।

     हरीश डर के कारण पीछे मुड़कर भी देखने का साहस भी नही कर रहा था। वह भय के कारण तेज चलने की कोशिश कर रहा था परन्तु वह चल नही पारहा था।

         हरीश का बदन पसीने से भीग चुका था। वह बहुत कठिनाई से घर पहु़च सका था। हरीश ने घर पहुँचकर पूरी घटना अपनी दादी को बताई।
      
       तब उसकी दादी उसको उसी समय  उस बगीचे में लेकर आई और हरीश से बोली," कहाँ है भूत पहले तो भूत होते ही नही और वह नीम के पेड़ पर नहीं रहते है। वह पीपल के पेड़ पर बताये जाते हो। "

     हरीश को  अपनी दादी की बात आज तक याद थी। उसने उस दिन के बाद भूतौ से डरना बन्द कर दिया था।
  
     आज हरीश जब गाँव आया था सबसे पहले बगीचे में गया और उसने उस पुराने नीम के पेड़ के नीचे बैठकर आराम किया।

             इति
दैनिक प्रतियोगिता हेतु रचना।
नरेश शमा "पचौरी"
22/07/2022

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11 Comments

Saba Rahman

24-Jul-2022 11:24 AM

Nice

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Mithi . S

23-Jul-2022 10:23 PM

Nice

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Rahman

23-Jul-2022 08:17 PM

Osm

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